Difference between revisions of "Childhood Prabhakar"
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मुस्कुराती हुई ललकार थी. | मुस्कुराती हुई ललकार थी. | ||
फिर मुड़कर पीछे देखा. ज़मीन पर पुराने कपड़े की चोटी पड़ी थी. प्रभाकर् की नज़र अब वहाँ गयी. | फिर मुड़कर पीछे देखा. ज़मीन पर पुराने कपड़े की चोटी पड़ी थी. प्रभाकर् की नज़र अब वहाँ गयी. | ||
| + | उसे अपनी ओर घसीटा. मुख पर फिरसे वही ध्यान , मुँह खुल गया, आँखें नीचे की ओर भागीं. भूरे हाथों के छोर पर हथेलियाँ गोरी चमक रही थीं, उन हथेलियों ने वो नाडा उठाया, पालती मारी छोटी जांघों के पार उसे खींचा, उसका सर पकड़कर देखा. फिर सर पीछे घुमाया.. नाडे की पूंछ वहाँ, पीछे पड़ी हुई थी. | ||
सरस्वती ने देखा कैसे बॉल कृष्णा साँप से उलझा हुआ था. | सरस्वती ने देखा कैसे बॉल कृष्णा साँप से उलझा हुआ था. | ||
[[Image:Kaliya Mardan.jpg]] | [[Image:Kaliya Mardan.jpg]] | ||
Revision as of 18:14, 11 February 2014
प्रभाकर ज़मीन पर खेल रहा था.. क्या उमर होगी, कुछ दिनों में एक साल का होने वाला था.. ज़मीन पर एक छोटी कढ़ाई पड़ी थी, जिस से मंदाकनी खेल कर उठी थी. मोटे फूलों की माला का एक एक फूल तोड़ कर, हर पंखुड़ी को अलग कर के, ये पकवान चमcच सहित छोड़ कर भाग गयी थी. प्रभाकर चारों पैरों के बल आया, एक टाँग घसीटता हुआ, ( उसकी यही आदत थी, शायद यह टाँग कमज़ोर थी).
एक छोटे हाथ ने च्मच उठाया, मुख पर मुस्कान फिसली, फैली, होंठ हिले तो दो दाँत चमक पड़े.
प्रभाकर् के छोटे हाथ ने उस चमच के भार को संभाला, और ध्वज की तरह सर के ऊपर हिलाया.
मुस्कुराती हुई ललकार थी.
फिर मुड़कर पीछे देखा. ज़मीन पर पुराने कपड़े की चोटी पड़ी थी. प्रभाकर् की नज़र अब वहाँ गयी.
उसे अपनी ओर घसीटा. मुख पर फिरसे वही ध्यान , मुँह खुल गया, आँखें नीचे की ओर भागीं. भूरे हाथों के छोर पर हथेलियाँ गोरी चमक रही थीं, उन हथेलियों ने वो नाडा उठाया, पालती मारी छोटी जांघों के पार उसे खींचा, उसका सर पकड़कर देखा. फिर सर पीछे घुमाया.. नाडे की पूंछ वहाँ, पीछे पड़ी हुई थी.
सरस्वती ने देखा कैसे बॉल कृष्णा साँप से उलझा हुआ था.