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सुबह की रोशनी, फाल्के की फिल्म कंपनी का एक आक्टर शिशु प्रभाकर को गोद में लिए वेरंडे के पार के दृश्य दिखाते हुवे बार बार चूम रहा है. धूप की रौनक सा बालक और छाँव के हल्केपन सा रंगा कलाकार. बच्चा सर हिला रहा है, चाचा के प्यार से परेशान, जैसे एकाग्र होकर सड़क देखना चाह रहा है.

Latest revision as of 09:31, 30 August 2013


सुबह की रोशनी, फाल्के की फिल्म कंपनी का एक आक्टर शिशु प्रभाकर को गोद में लिए वेरंडे के पार के दृश्य दिखाते हुवे बार बार चूम रहा है. धूप की रौनक सा बालक और छाँव के हल्केपन सा रंगा कलाकार. बच्चा सर हिला रहा है, चाचा के प्यार से परेशान, जैसे एकाग्र होकर सड़क देखना चाह रहा है.